जाल
जीवन के जाल में,
फसता गया,
आई जो मौत,
वो उसकी ओर चलता गया,
साथ में था साथी,
वो थमता गया,
कर रहा है पीछा,
साया उसका एक,
वो सामने देख उसको,
थम सा गया।
उम्र थी पचास,
और तजुर्बे हजार,
वो खुद हताश होके,
दूसरो को हसाता गया,
देख इतने मुखौटे को,
वो हर एक बार,
पर्दा हटाता गया,
देखा है इतने बार,
खुद को गिरते हुए,
की अब जो बात आई गिरने की,
वो खुद को संभालता गया,
जीवन की जाल,
मे फसता गया,
लिया तिनके का सहारा,
फिर भी डूबते हुए,
आया याद, कि कैसे,
संभलना था खुद को,
डूब तो फिर भी रहा था,
दरिया में, पर वो याद,
उसे संभालता गया,
ये जो सारी बाते है,
मै बताऊं किसे,
यह सोच, पन्ने लिखे,
और प्रभाव देके चाला गया,
जीवन के जाल में,
फसता गया।।।
This was the best I could read ever from a 20 year old .. I wish I will read this whenever I remember about u. This is really so sobre n classically creative . ❤️🌼 Thnx for sharing ur artwork
ReplyDeleteThankyou so much shashwat I appreciate it:)
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