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Showing posts from July, 2023

poetry

बस बाहों में तुम, तुम में ये दुनिया, दुनिया से बढ़ के तुम, तुम में ये खूबियां, बस बाहों में सुकून, उन बाहों में तुम, तुमसे ही वनवास, तुममें ही गुम, बस बाहों में सुख, सुख का समंदर तुम, बस बाहों में दुनिया, दुनिया से बढ़ कर तुम, तुम ही आस, तुम ही रास, तुमसे से बढ़ कर कुछ नही, तुम्हारे पर्यंत, तुम्हारे अलावा, सब शून्य, बस बाहों में दुनिया, दुनिया से बढ़ कर तुम, कहानी तुम, किस्सा तुम, किरादार तुम, तुम से ही हम, हम से ही तुम, तुम!!!

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रेत सा निकलता समय, सामने आके भी रुकता नही, दिमाग में सवाल कई, पर खुद से कभी रुकता नही, दूसरो की बातों में आता, खुद से कभी सोचता नही, बस भाग दौड़ में, चलता समय, खुद से कभी रुकता नही, दूसरो की मायूसी में, खुद को कभी देखता नही, रेत सा निकलता समय, सामने आके रुकता नही, रेत सा निकलता समय, प्यार से कभी पुकारता नही, खुद को जूझता हुआ देखता, पर सामने कभी रोता नही, रेत सा निकलता समय, कभी गलती से झपकी लेता नही, खुद से भी खूबसूरत, प्रकृति में ढलता समय, रेत सा मिलता समय।।।